हनुमान गौतम उर्फ़ जख्मी राही
जीवन है एक रणभूमि तो जंग है अपने आप से, निराशाओ के दामन में खुद को लपेट रहोगे तो सोचो तुम्हारा क्या होगा, जिंदा रहकर संघर्ष करना है नहीं तो मर जाने से क्या होगा
2. परीक्षा तो देनी होगी हर कदम पर दुनिया में कोशिश तो हर पल करते जाओ घबराने से क्या होगा
3. अगर बुलंद तुम्हारा हौसला है तो कामयाबी निश्चित ही मिलेगी एक दिन हार के बाजी हौसलों की, फिर तन्हा घर लौटने से क्या होगा
4. मीठी बोली से जब सारे काम बन जाते हैं जमाने में, झूठ बोलकर तुम चमचागिरी करो, फिर भी यदि मंजिल ना मिले तो फिर गुलामी करने से क्या होगा
5. मिलकर सब
आवाज उठाओ अगर तुम्हें हालात बदलने हैं, एक अकेले के चिल्लाने से सोचो भला फिर क्या होगा
। जख्मी राही।।





