जख्मी राही
मुझे मालूम है तेरी रहमत से तकदीर बदल जाती है,ओर तेरी एक नजर से जहां की तस्वीर बदल जाती है
2. इमान से बड़ी कोई इबादत नही, तेरी चौखट से बडी कोई दोलत नहीं
3. आए थे तेरी दीद पर वेदिद होकर चल दिये , तुम ना मिले तो क्या हुआ मेरे खुदा हम तो तेरी चौखट चूम कर चल दिये
4. मिटा दे अपनी हस्ती को मर्तबा कुछ चाहे, की दाना खाक में मिलकर गुले गुलजार होता है
5. जख्मी ने मन की बात लिखी तो कोहराम मच गया, तेरी रहमत का जो हाथ मेरे सर पर हो गया, जख्मी अब जख्मी राही से मशहूर हो गया ।।
लेखक हनुमान गौतम उर्फ़ जख्मी राही





