मनुष्य के भीतर छुपी अपार संपदा

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मनुष्य के भीतर छुपी अपार संपदा

मानवीय मन अनंत शक्तियों का भंडार है-और जितना उनका विकास हुआ है, उससे बहुत ज्यादा विकास की सम्भावनाएँ हैं। हम स्वयं को जान सकते हैं और स्वयं के ज्ञान पर हमारे जीवन और अन्तःकरण के बिलकुल ही नये आधार रखे जा सकते हैं। एक बिलकुल ही अभिनव मनुष्य को जन्म दिया जा सकता है।
हम सब के भीतर एक आंईस्टीन, एक पंडित रविशंकर या एक वाॅनगाॅग छुपा हैै जो एक सुनिश्चित वैज्ञानिक विधि से बाहर आ सकता है। इस जगत में हुए प्रबु( सदा से कहते आए हैं कि हमारे भीतर एक अपार संपदा छुपी है, आवश्यकता है मात्र उसे बाहर लाने की।
पाइथागोरस
बात लगभग 600 ईसा पूर्व की है। ग्रीस में समंदर किनारे तपती हुई रेत पर एक आदमी चला जा रहा था। सूरज की जलती हुई रोशनी आग बन बरस रही थी। झुलसते हुए तन और बदहवास मन से बेखबर वह व्यक्ति किसी अलग ही दुनिया में लीन था। अचानक एक विचार बिजली की चमक की तरह उसके अन्तस में लहराया और वह अंगारों-सी रेत पर बैठ गया और अपनी उँगली से एक आकृति बनाने लगा। यह आकृति थी एक समकोणीय त्रिकोण की अ और ब रेखाएं छोटी थीं और स सबसे लम्बी। इन सभी रेखाओं पर उसने वर्ग बना डाले और पाया कि अ और ब पर बने वर्गों का जोड़ स पर बने वर्ग के बराबर था।
यह व्यक्ति था पाइथागोरस और वहाँ पाइथागोरस की थ्योरम का अवतरण हो रहा था जो आधुनिक ज्यामिती की सर्वाधिक महत्वपूर्ण खोज की तरह जानी जाती है।
आर्कमिडीज़
प्रसि( प्राचीन ग्रीक गणितज्ञ आर्कमिडीज़ ने ‘घनत्व एवं प्लवनशीलता’ के सि(ान्त की खोज नहाते समय की थी। लगभग 250 वर्ष ईसा पूर्व आर्कमिडीज एक टब में लेटा स्नान कर रहा था और उसने अपने वजन से टब से बाहर निकलते पानी को देखा जो हम सब के लिए एक साधारण घटना होगी। लेकिन आर्कमिडीज़ के लिए यह घटना घनत्व के सि(ान्त से साक्षात्कार का साधन हो गई। बाथटब में पानी के प्रवाह को देखते हुए उन्हें महसूस हुआ कि वह पानी में किसी वस्तु को डुबोकर और उससे पानी का कितना विस्थापन हुआ है, इसकी परीक्षा करके घनत्व का निर्धारण कर सकते हैं। कहा जाता है कि आर्कमिडीज़ बाथटब से उछलकर बाहर निकले और गलियों में दौड़ते हुए ‘यूरेका! यूरेका!’ चिल्लाने लगे।
वूडी एलन
लेखक, कलाकार और निर्देशक वूडी एलन, नए रचनात्मक विचारों के लिए कई बार पौन घंटे तक पानी के नीचे खड़े रहते हैं। एक इंटरव्यू में एलन ने बताया कि जैसे-जैसे गरम पानी फव्वारे से नीचे गिरता है, वे वास्तविक दुनिया पीछे छोड़ते चले जाते हैं। बहुत तेजी से नई चीज़ें खुलती चली जाती हैं। यह स्थान का बदलाव है, जो दिमाग में गहरे बैठे विचार को बाहर निकालता है।
जाॅन लैनन
राॅक एंड रोल के बादशाह जाॅन लैनन को ‘बींग फाॅर द बेनिफिट आॅफ मिस्टर काइट’ का विचार दुर्लभ वस्तुओं की दुकान पर एक नए पोस्टर देखते समय आया। रेस्तरां जाते समय वे दुकान में गये। पोस्टर में जो कुछ था, उसे ही थोड़ा आगे ले जाते हुए उन्होंने पूरा गाना तैयार कर दिया।
जे.के. राॅलिंग
ब्रिटिश उपन्यासकार जे.के. राॅलिंग को ‘हैरी पाॅटर’ का विचार एक खचाखच भीड़ वाली रेल में यात्रा करते हुए आया। उस समय उसे लिखने के लिए उनके पास पैन नहीं था। शर्मीले स्वभाव के कारण वे किसी से माँग भी नहीं पा रही थी। अपने विचार को दिमाग में दर्ज करने के लिए वह शेष चार घंटे की यात्रा में उसी पर सोचती रहीं।
गर्टरूड स्टाइन
अमेरिकी लेखिका गर्टरूड स्टाइन को अपने सबसे बेहतरीन विचार कार चलाते समय गायों को देखते समय आते थे। वे किसी फार्म हाउस के पास घूमते हुए अलग-अलग तरह की गायों को देखती रहती थीं, जब तक उन्हें ऐसी गाय नही मिल जाती थी, जो उन्हें प्रेरित कर सके। वे दिन भर में केवल 30 मिनट लिखती थीं।
निकोल टेस्ला
सर्बियाई अमेरिका के आविष्कारक, इलेक्ट्रिकल इंजीनियर व आधुनिक आॅल्टरनेटिंग करेंट इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई सिस्टम के डिजायन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले निकोला टेस्ला को अपने बेहतरीन विचार अपनी प्रयोगशाला से बाहर आते थे। आॅल्टरनेटिंग करेंट का विचार उन्हें तब आया, जब वे आराम करने के लिए घूमने गए हुए थे।
एक साइंस चैनल के अनुसार, उस समय उन्होंने अपने सहकर्मी को पूरा विचार समझाने के लिए उन्होंने जमीन में अपनी छड़ी से तस्वीर बनायी थी।
न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण का सि(ान्त और ऐलेक्जैंडर फ्लेमिंग द्वारा पेनिसिलिन की खोज भी कुछ ऐसे ही क्षणों में हुई।
यह बात भी सत्य है कि यह सभी वैज्ञानिक थे और इन्हीं रहस्यों पर कार्य कर रहे थे। लेकिन इन रहस्यों पर से उनके लिए पर्दा तब नहीं उठा जब वे उस पर कार्य कर रहे थे बल्कि यह रहस्योद्घाटन तब हुआ जब वे गहन विश्रांति में थे और मेहनत करते हुए थक चुके थे।
यह तो वैज्ञानिक थे शोधकर्ता थे। अब आइये बात करें उन लोगों की जो सामान्य लोग हैं, लेकिन अचानक अद्भुत प्रतिभाओं का प्रदर्शन करने लगे। विश्व इतिहास में कुल 50 लोगों का वर्णन है जिन्हें एक्कायर्ड सवांत सिंड्रोम से प्रभावित लोगों की तरह जाना जाता है। इन सभी के या तो मस्तिष्क पर चोट लगी या वे मस्तिष्क के किसी रोग से प्रभावित हुए थे। आज भी इनमें से कुल 8-10 लोग जीवित हैं ओर विज्ञान के लिए रहस्य बने हुए हैं।
स डेरेक अमाटो एक स्विंमिंग पूल के छिछले पानी में खड़ा था और उसने मित्र से फुटबाल फेंकने को कहा। जब वह बाॅल लपकने के लिए कूदा उसका सर पूल के किनारे से जा टकराया। उसके सिर में एक विस्फोट सा हुआ और वह पानी में डूबने लगा। उसके मित्र ने पानी में छलाँग लगाई और उसे संभाला। यह वर्ष 2006 था और 39 वर्षीय डेरेक जो एक सेल्स टेªनर था अपने घर छुट्टियों पर लौटा था। उसके मित्र उसे उसकी माँ के घर ले गए। पूरे रास्ते वह कभी होश में आता और फिन अपना होश खो बैठता। जब भी वह होश में आता वह कहता, ‘मैं एक पेशेवर बेसबाल खिलाड़ी हँू और मुझे फिनिक्स शहर अपनी टेªनिंग पर जाना है। जबकि उसका दूर-दूर तक बेसबाल से कुछ लेना-देना नहीं था। घर पहुँचने पर उसकी माँ उसे तुरन्त अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लेकर गई, जहाँ पता चला कि उसके अग्र मस्तिष्क पर गहरा आघात हुआ है। डाॅक्टरों ने उसका उपचार करने के बाद हिदायत दी कि उसे हर कुछ घण्टों के बाद जगाना होगा।
वह लम्बे समय तक एक कान के बहरेपन, सिरदर्द ओर कमजोर समृति का शिकार रहा। लेकिन दुर्घटना के चैथे दिन ही उसके जीवन में एक चमत्कृत कर देने वाली घटना घटी।
एक लम्बी नींद के बाद डेरेक अपने मित्र स्ट्रम, जिसने उसे स्विमिंग पूल में संभाला था, के घर गया। वह एक संगीतकार था और उसके स्टूडियो में कई वाद्ययन्त्र पड़े थे। दोनों मित्र बात कर रहे थे कि डेरेक ने अचानक एक की-बोर्ड को हाथ तक नहीं लगाया था।
थोड़ी ही देर में उसकी उँगलियों की-बोर्ड पर ऐसे थिरकने लगीं जैसे वह वर्षों से अभ्यास कर रहा हो। पूरा वातावरण मानो जादुई हो गया और कमरा एक दिव्य संगीत से सराबोर हो उठा। जब डेरेक ने चरम सीमा पर संगीत को लाकर अपनी उँगलियों को रोककर सिर उठाकर देखा उसके मित्र की आँखों में आँसू थे। डेरेक के सिर पर लगी चोट ने उसे एक संगीत विशारद में रूपांतरित कर दिया जिसने अपने जीवन में संगीत की एक कक्षा भी नहीं ली थी। ;स्रोत-‘पापुलर साइंस’ पत्रिकाद्ध
स 31 वर्षीय जेसने पैजेट को पढ़ाई-लिखाई में तनिक भी रूचि नहीं थी। चमड़े की छाती तक खुली जैकेट और चुस्त जींस पहने वह अपने दोस्तों के साथ ऐसे जीता था जैसे कोई किशोर हो। उसके शौक थे पहाड़ियों से छलाँग लगाना, हवाई जहाजों से कूदना या अपने दोस्तों के साथ कार रेस लगाना।
;शुक्रवारद्ध सितम्बर 13, 2012 में उसकी यह ज़िन्दगी पूरी तरह बदल गई जब वह एक बार से बाहर आया। दो गुण्डों से मुठभेड़ हुई और उन्होंने उसे बुरी तरह पीटा, वह गुंडे मात्र उसकी जैकेट छीनना चाहते थे जिसमें वह अन्ततः सफल हुए।
उसे अस्पताल ले जाया गया जहाँ पता चला कि उसके सिर और किडनी पर चोटें लगी हैं। प्राथमिक उपचार के बाद उसे उसी दिन छुट्टी मिल गई।
सुबह जब उसकी नींद खुली और वह अपना मुँह धोने वाॅश बेसिन की ओर गया। तब जो घटना घटी उसने उसका जीवन बदल दिया। नल से बहती हुई धार उसे असंख्य सीधी रेखाओं जैसी दिख रही थी। पहले तो उसे चिंता हुई कि उसके मस्तिष्क में कुछ खराबी आ गई लेकिन फिर उसे बड़ा आनन्द आने लगा। पैजेट के शब्दों में ‘अब जब मैं अपनी काॅफी में पड़ी क्रीम देखता हूँ तो मुझे पूर्ण बर्तल नजर आते हैं। यह मेरी सुबह का काॅफी नहीं होती बल्कि ज्यामिती मुझसे बात कर रही होती है।’ पैजेट के मस्तिष्क में आज एक ऐसा जगत है जो भिन्न आकृतियों और एल्जेब्रा के फार्मूलों से भरा है। आज वह गणित के कुछ चुनिंदा विद्वानों में से एक है।
उस पर सर्वेक्षण कर रहे वैज्ञानिक कहते हैं कि चोट से उसके मस्तिष्क के कुछ भाग अति सक्रिय हो गये हैं। जिसके कारण वह गणित का विशेषज्ञ हो गया। लेकिन यह घटनाएं कुछ प्रश्नों को जन्म देती हैं।
कहते हैं कि हरेक इंसान की ज़िन्दगी में एक मौका ऐसा जरूर आता है, जो उसके जीवन की धारा बदल सकता है। कुछ उस एक पल को अपनी गिरफ्त में ले, सफलता के परचम लहरा देते हैं तो कुछ उसे रेत घड़ी में गिर रही रेत की तरह झरने देते हैं। आप भी चूकिएगा मत, क्योंकि हर आने वाला पल जाने वाला है।

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