Skip to content
HKSNEWS
HKSNEWS
  • अलीगढ समाचार
  • उत्तर प्रदेश
  • शिक्षा एवं रोजगार
  • राष्ट्रीय समाचार
  • एटा समाचार
  • सरकारी योजनाएं
  • योग एवं सेहत
  • मोटिवेशन एवं आत्मविश्वास
  • अलीगढ समाचार
  • उत्तर प्रदेश
  • शिक्षा एवं रोजगार
  • राष्ट्रीय समाचार
  • एटा समाचार
  • सरकारी योजनाएं
  • योग एवं सेहत
  • मोटिवेशन एवं आत्मविश्वास
अलीगढ समाचार

जिले में इस वर्ष लगभग 2 लाख हेक्टेयर भूमि में गेहूं की बुवाई का अनुमान   -मुख्य विकास अधिकारी

By HKSNEWS
July 20, 2026

अलीगढ़  : जिले में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने में बीज विधायन संयंत्र एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभरकर सामने आए हैं। आधुनिक कृषि के इस दौर में जहां उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ गुणवत्ता और लाभप्रदता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, वहीं कृषि विभाग द्वारा संचालित बीज विधायन संयंत्र किसानों के लिए आशा की नई किरण बन रहे हैं। ये सन्यंत्र न केवल किसानों को उन्नत किस्म के प्रमाणित बीज उपलब्ध करा रहे हैं, बल्कि उन्हें वैज्ञानिक खेती की ओर प्रेरित करते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।

मुख्य विकास अधिकारी योगेंद्र कुमार के अनुसार जिले में इस वर्ष लगभग 2 लाख हेक्टेयर भूमि में गेहूं की बुवाई का अनुमान है। इतनी बड़ी क्षेत्रफल में उच्च उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है। इसे ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग ने समय रहते सभी राजकीय बीज भंडार केंद्रों पर 2800 कुंतल गेहूं, 37 क्विंटल सरसों, 28 क्विंटल मसूर के उन्नत बीजों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने की योजना बनाई है। यह पहल इस बात का प्रमाण है कि विभाग किसानों की जरूरतों और समयबद्ध कृषि कार्यों के प्रति सजग और संवेदनशील है। बीज विधायन संयंत्रों की कार्यप्रणाली पूरी तरह वैज्ञानिक और व्यवस्थित होती है। सोमना, कलाई, क्वार्सी, कीरतपुर , लोधा, नवीपुर में राजकीय बीज संवर्धन प्रक्षेत्रों पर उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का उत्पादन किया जाता है। यहां चयनित मूल बीजों को वैज्ञानिक तरीकों से उगाया जाता है, ताकि उनकी शुद्धता और उत्पादकता बनी रहे। इसके बाद इन बीजों की विधिवत जांच, प्रसंस्करण, पैकिंग और मार्किंग की जाती है, जिससे किसानों को पूरी तरह प्रमाणित और भरोसेमंद बीज प्राप्त हो सकें।

उप निदेशक कृषि अरुण कुमार चौधरी बताते हैं कि बीज विधायन संयंत्रों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां तैयार किए जाने वाले बीज स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुरूप होते हैं। इससे किसानों को बेहतर उत्पादन प्राप्त होता है और फसल में रोगों का खतरा भी कम हो जाता है। धान एवं उर्द की उन्नत प्रजातियों के साथ-साथ गेहूँ, बाजरा एवं अन्य फसलों के बीजों की उपलब्धता भी किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। इससे फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिल रहा है. जो कृषि की स्थिरता और किसानों की आय वृद्धि के लिए बेहद जरूरी है।

कृषि विभाग द्वारा तैयार किए गए इन बीजों का वितरण राजकीय बीज भंडार केंद्रों के माध्यम से पारदर्शी और सुव्यवस्थित तरीके से किया जाता है। किसानों को उचित दरों पर प्रमाणित बीज उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे उन्हें बाजार की अनिश्चितता और महंगे दामों से राहत मिलती है। इसके अलावा, विभाग द्वारा समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम और प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किए जाते हैं, जिनमें किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, बीज उपचार, उर्वरक प्रबंधन और सिंचाई के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी जाती है।

बीज विधायन संयंत्रों की भूमिका केवल बीज उत्पादन और वितरण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ये केंद्र कृषि नवाचार और तकनीकी प्रसार के भी महत्वपूर्ण माध्यम हैं। यहां किसानों को नई-नई प्रजातियों और तकनीकों से परिचित कराया जाता है, जिससे वे पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक पद्धतियों को भी अपनाने के लिए प्रेरित होते हैं। इसका सीधा लाभ उत्पादन में वृद्धि और लागत में कमी के रूप में देखने को मिल रहा है।

उपनिदेशक कृषि चौधरी अरुण कुमार और जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र कुमार चौधरी के नेतृत्व में कृषि विभाग की यह पहल निश्चित रूप से सराहनीय है। उनके मार्गदर्शन में विभाग ने बीज उत्पादन और वितरण की पूरी प्रक्रिया को प्रभावी और पारदर्शी बनाया है। यही कारण है कि आज अलीगढ़ के किसान न केवल आत्मविश्वास के साथ खेती कर रहे हैं, बल्कि बेहतर उत्पादन और आय के नए कीर्तिमान भी स्थापित कर रहे हैं।

बीज विधायन संयंत्रों का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ये अन्य जनपदों को भी बीज उपलब्ध कराते हैं। इससे अलीगढ़ न केवल अपने किसानों की जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि अन्य क्षेत्रों के किसानों की भी सहायता कर रहा है। यह पहल प्रदेश स्तर पर कृ षि विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आज के प्रतिस्पर्धात्मक कृषि परिदृश्य में जहां किसानों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, वहां बीज विधायन केंद्र उनके लिए एक मजबूत सहारा बनकर उभरे हैं। ये केंद्र किसानों को यह विश्वास दिलाते हैं कि यदि उन्हें सही समय पर सही गुणवत्ता का बीज मिल जाए, तो वे किसी भी परिस्थिति में बेहतर उत्पादन कर सकते हैं। अंततः यह कहा जा सकता है कि अलीगढ़ के बीज विधायन संयंत्र किसानों को उन्नति की राह दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ये केंद्र न केवल कृषि उत्पादन को बढ़ाया दे रहे हैं. बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में भी निरंतर कार्य कर रहे हैं।

Author

HKSNEWS

Follow Me
Other Articles
Previous

जिला खेल प्रोत्साहन समिति की बैठक में खेल सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और प्रतिभाओं को अवसर देने पर जोर

Next

जिलाधिकारी अविनाश कुमार के निर्देश पर तैयार हुआ व्यापक प्रस्ताव, घनी आबादी और व्यस्त बाजारों को मिलेगी प्राथमिकता

No Comment! Be the first one.

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright@ Hksnews