जख्मी राही
चमत्कार को ही नमस्कार है
1=मुझे मालूम है तेरी रहमत से तकदीर बदल जाती है।
तेरी एक नजर से जहां की तस्वीर बदल जाती है
2=कैसे कह दूं कि थक गया हूं मैं
न जाने किस-किस का हौसला हूं मैं।।
3=अपनी-अपनी सब कहे तान यहां विद्वान
मगर आपके भेद की कर ना सके पहचान
4=मुझको जानने की कोशिश करोगे। तो खुद को भूल जाओगे
पहचान लोगे अपने आप को तो मुझको भी जान जाओगे
5=हम तो वो परिंदे हैं जो सावन हरे ना भादो सुखे
सरफरा कहते हैं लोग मुझको , ना पाने से खुश होते हैं ना खोने से रोते। ।।
लेखक हनुमान गौतम उर्फ जख्मी राही
8278620863





