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मोटिवेशन एवं आत्मविश्वास

संकट और समस्याओं पर विजय

By HKSNEWS
July 21, 2026

संकट और परेशानियाँ
कोई विपदा आते ही अपने भाग्य पर दोषारोपण करने लगना और ईश्वर की सत्ता पर विश्वास अस्थिर हो उठना एक सामान्य मानवीय प्रतिक्रिया है। हताशा मन-मस्तिष्क को घेर लेती है। हताशा से समस्या का न तो सही आंकलन हो पाता है और न ही उससे जूझने के लिए पर्याप्त शक्ति संयोजित हो पाती है। मनुष्य अपनी इंद्रियों और बौ(िक चेतना के कारण सभी जीवोें में श्रेष्ठ है। यह एक बड़ा उपकार ही मनुष्य को परमात्मा के प्रति किसी भी प्रकार के संदेह को निर्मूल सि( करने के लिए पर्याप्त है।
पत्थर छैनी-हथौड़ी की चोट खाकर ही मूर्ति में तब्दील होता है तथा सर्वत्र उसकी पूजा होती है। ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो विपत्तियांे व समस्याओं ने ही मानव कल्याण की राह खोली है। यदि श्रीराम को वनवास हुआ और सीता-हरण हुआ तभी मानवता को मर्यादा पुरुषोत्तम का सद प्रेरणास्पद चरित्र मिला। महाभारत ने भगवद्गीता का उपहार दिया। कबीर समाज से तिरस्कृत होकर काशी से मगहर गए, तो कबीर वाणी अमर हो गई। सिख गुरुओं की शहादत ने धर्म-संस्कृति और सभ्यता को काल कलवित होने से बचा लिया। विपत्तियाँ सदैव मनुष्य को निखारने और बड़ी विपत्ति से बचाने के लिए होती हैं।
समस्याएँ
हमारे जीवन में तमाम समस्याएँ, उतार-चढ़ाव और परेशानियाँ आती हैं, हम इनसे डर जाते हैं। किसी स्कूल, यूनिवर्सिटी में समस्याओं से निपटने की शिक्षा नहीं दी जाती है। लोग समस्याओं का रोना रोते रहते हैं। बहुत से लोग हताश-निराश होकर आत्महत्या तक कर लेते हैं। रोना रोना या आत्महत्या करना किसी समस्या का समाधान नहीं है। हम अपनी ज़िन्दगी के अनुभव से ही समस्याओं से दो-चार होते हैं। हमारी शिक्षा कुछ इस तरह से होनी चाहिए, जिससे कि हम तमाम समस्याओं पर विजय हासिल कर सकें।
समस्याएँ कई तरह की होती हैं। ज्यादातर लोगों की समस्याएं आर्थिक, शारीरिक व रिलेशनशिप सम्बन्धी होती है। आकस्मिक आपदा/दुघर्टना, घर में आग लग जाना, चोरी हो जाना, प्रियजन की मृत्यु, धोखा, लड़ाई-झगड़ा होना। इस प्रकार के संकट और समस्याएँ इंसान को अन्दर से तोड़कर रख देते हैं।
बुजुर्ग लोग कहा करते हैं कि ज़िन्दगी में ईश्वर तीन प्रकार के कोट;वर्दीद्ध से बचाये रखे-काला कोट, सफेद कोट और खाकी वर्दी।
ज़िन्दगी में गंभीर बीमारी या दुर्घटना आदि के कारण हमारा सामना अस्पताल यानी सफेद कोट ;क्वबजवतश्ेद्ध से पड़ता है। कोई भी शरीफ आदमी पुलिस या कोर्ट कचहरी के पचड़े में नहीं पड़ना चाहता। लेकिन कानून की अनभिज्ञता या लापरवाही या दूसरे व्यक्तियों द्वारा हमारे हकों का मारा जाना, झूठा फंसाये जाने के कारण या जमानत आदि के मामले में हमारा सामना कई बार अदालत यानी काले कोट ;स्ंूमतश्ेद्ध और खाकी वर्दी ;च्वसपबमद्ध से होता है ;इसके अतिरिक्त एक अनुभवी व्यक्ति और हमारे डेयरी पार्टनर श्यामलाल जी का कहना है कि एक कोट और होता है, जिसका नाम है पेटीकोट यानि इश्क के पचड़े। तमाम लोग इश्कवाजी में बर्वाद हो चुके हैं।द्ध ज़िन्दगी में किसी न किसी मोड़ पर हमारा सामना किसी न किसी ‘कोट’ से हो ही जाता है।
हमारी ज़िन्दगी में कई ऐसे संकट आते हैं जब कभी हमारे ‘धन’ पर बन आती है, कभी हमारी ‘जान’ पर बन आती है और कभी हमारी ‘इज्जत’ पर बन आती है। संकट और समस्याओं का मतलब है-टेस्टिंग टाइम। यह आपकी परीक्षा की घड़ी है। संकट के समय कई बार परिवारजन, मित्र आदि भी आपका साथ नहीं देते हैं। यही वह वक्त होता है, जब आपको धैर्य व सूझबूझ से काम लेना होता है।
समस्याएँ हैं, बधाई!
अगर आप जिन्दा हैं तो आपके जीवन में समस्याएँ निश्चित रूप से आयेंगी। जिसके जीवन में एक भी समस्या नहीं है, वो मुर्दा हैं। आपके जीवन में समस्याएँ हैं तो आपको बधाईयाँ, क्योंकि-
स समस्याएँ हमारे लिए नए दरवाजे खोलती हैं।
स समस्याएँ हमें सही राह पर लाती है।
स समस्याएँ हमें महत्वपूर्ण सबक सिखाती हैं।
स समस्याएँ हमारे अन्दर की छिपी क्षमताओं को बाहर निकालती हैं।
स समस्याएँ आत्म-विश्वास और आत्म सम्मान बढ़ाती हैं।
इसलिए दुःख और समस्याओं का स्वागत करें और प्रकृति या परमात्मा को धन्यवाद दें, उसने आप पर भरोसा किया है कि आप समस्याओं से निकल सकते हैं। समस्याएँ सब पर आती हैं, कोई निखर जाता है, तो कोई बिखर जाता है। हर समस्या में एक समाधान छुपा होता है। बस जरूरत मस्तिष्क को ठण्डा और शाँत रखकर विचार करने की है। आप बिखरने के लिए नहीं, निखरने के लिए बने हैं।
समस्याओं से निपटने की दस सूत्रीय रणनीति
1. समस्याओं का रोना न रोयें
अपनी तकलीफ कभी भी दूसरों को मत बतायें। 20 फीसदी को इससे कोई मतलब नहीं होता और 80 फीसदी लोग आपको तकलीफ में देखकर खुश होते हैं।
-लाउ होत्ज
हमारे एक मित्र हैं असिस्टेंट कमिश्नर;ट्रेड टैक्सद्ध श्री वीरसिंह वर्मा। एक बार मैं उनसे बात कर रहा था, तो उन्होंने बताया जब वे छोटे और अन्जान थे अक्सर पेड़ों पर चढ़ जाते थे तथा पक्षियों के घांेसले तोड़ देते थे। बया पक्षी बड़ा खूबसूरत घोंसला बनाता है वह बया पक्षी के घोंसलों को तोड़ लाते थे लेकिन वह पक्षी अपना घोंसला फिर से बनाने में जुट जाता था। कई बार वे अधबने घोंसले को ही पेड़ से ले आते थे। लेकिन बया पक्षी बिना किसी शिकवा शिकायत किये फिर दोवारा से घोंसला बनाना शुरू कर देता था। वे बताते हैं कि केवल आदमी ही ऐसा ‘जीव’ है, जो रोना रोता रहता है। मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहता हँू-अगर आपको ठोकर लग जाये और आप सड़क पर गिर जायें तो आप क्या करेंगे? वहीं पड़े-पड़े रोते रहेंगे या उठकर आगे बढ़ने की तैयारी करेंगे? मतलब साफ है आप समस्याओं का रोना-रोना अभी बन्द करें और अपने कर्तव्य का निर्वाह करें।
2. भावनात्मक प्रतिक्रिया न करें, मन को शांत रखें
सबसे महत्वपूर्ण काम है समस्याओं के समय दिमाग का सन्तुलन बनाये रखना, अतः समस्याओं पर भावनात्मक प्रतिक्रिया न करें।
आपने एक कहानी सुनी होगी? एक बार शनिदेव ;जिन्हें शनीचर भी कहा जाता हैद्ध शंकर जी के घर पहँुचे, शंकर जी ने शनिदेव का स्वागत किया और बोले ‘आप हमारे यहाँ आये, आपका बहुत-बहुत स्वागत है।’ शंकर जी ने उनका यथोचित सत्कार किया। शनिदेव जी ने शंकर जी से कहा कि मैं आपके व्यवहार से बहुत प्रसन्न हँू। आपको पता है कि मैं जहाँ भी जाता हँू लोगों को बर्वाद कर देता हँू चूंकि मैं आपके व्यवहार से खुश हँू, इसलिए आप अपनी किसी एक प्रिय वस्तु को बचा सकते हैं। शंकर जी ने कहा मुझे तो पार्वती जी सबसे प्रिय हैं लेकिन मैं एक बार पार्वती जी से बात करना चाहूँगा। शंकर जी ने पार्वती जी से कहा कि ‘मैं तुम्हें बचा रहा हँू। बर्वाद तो सब होना ही है’ इस पर पार्वती ने कहा कि ‘मुझे बचाने से अच्छा है कि हम लोगों की बु(ि सलामत रहे।’ दोनों ने विचार विमर्श करके शनिदेव को बताया कि ‘महाराज, आप हमारी बु(ि को छोड़कर हर वस्तु को नष्ट कर सकते हैं’ इस बात पर शनिदेव ने अपना बोरिया-बिस्तर बांध लिया और चलने लगे। शंकर जी ने कहा महाराज यह क्या? शनिदेव बोले मैं जा रहा हूॅ, क्योंकि मैं जहाँ भी जाता हँू सबसे पहले आदमी की बु(ि का ही हरण करता हँू।
इसलिए आपको अपनी समस्याओं पर कोई भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं करनी है। आपको अपने दिमाग का सन्तुलन बनाये रखना है फिर शनिदेव भी आपका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकते। ध्यान रखिए, शाँत मस्तिष्क हमेशा शक्ति देता है।
3. संकट या समस्या को जानें
समस्याओं के समाधान के लिए दूरदर्शिता से काम लें। समस्या जब छोटी हो तभी उसे खत्म कर दें। नहीं तो समस्या बड़ी होती जाएगी और उसे खत्म करने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। तनाव भी झेलना पड़ेगा, कुछ लोग अपनी समस्याओं को पाल पोस कर बड़ा करते रहते हैं, जो उनके लिए बड़ा दुःखदायी होता है।
हम समस्याओं के अन्दर उनके समाधान के भी लक्षण होते हैं। समस्या पर लगातार उसका हल सोचने से उस समस्या का हल मिल जाता है। अपनी ऊर्जा समाधान खोजने की दिशा में लगायें। आप सोचें संकट या समस्या क्या है?, कहाँ है?, कैसी है? और उसका हल क्या हो सकता है? उस के विविध पहलुओं पर विचार करें। समस्या को जान समझकर और उसके समाधान पर ध्यान केन्द्रित करके ही आप संकट या समस्या का निदान कर सकते हो। व्यक्तिगत समस्याओं पर आप अपने मित्रों, अभिभावकों, रिश्तेदारों या विशेषज्ञों से सलाह लेकर एक निष्कर्ष पर पहुँच सकते हैं।
आपने सावित्री और सत्यवान की कहानी सुनी होगी? सावित्री को यह भलीभांति पता था कि उसके पति की मृत्यु एक साल के अन्दर निर्धारित समय पर हो जाएगी। लेकिन उसके बावजूद भी उसने सत्यवान से शादी की। बड़ी भारी समस्या थी, लेकिन सावित्री ने शादी के पहले दिन से एक ही काम किया, यह सोचना कि यमराज से अपने पति के प्राण कैसे बचाये जाएं। उसने दिन-रात केवल एक ही काम किया- सोचना। उसी पर लगातार ‘होमवर्क’ किया और उसने यमराज से मनोवैज्ञानिक तरीके से बातचीत कर अपने रहने के लिए घर और माता-पिता की आँखें स्वस्थ होने तथा पुत्रवान होने का वरदान माँगकर अपने पति के प्राण बचा लिये। जाहिर है, जब सावित्री समस्या के बारे में सोच-सोचकर उसका हल निकाल सकती है तो आप क्यों नहीं?
4. भागें नहीं, समस्याओं का मुकाबला करें।
एक बार स्वामी विवेकानन्द कहीं जा रहे थे। रास्ते में एक कुत्ता भौंकने लगा तथा उनके भागने पर वह कुत्ता भी उनके पीछे भागने लगा तभी स्वामी विवेकानन्द रूके तथा कुत्ते को ईंट मारने का अभिनय करते हुए जमीन से हाथ ऊपर उठाया तो कुत्ता वहीं सहमकर रूक गया। ठीक इसी प्रकार जैसे ही आप समस्याओं से सामना करने को तैयार होते हैं, समस्या वहीं रूक जाती है। आपको सूझ-बूझ से काम लेना होगा। हम यह जानते ही नहीं है कि हमारे अन्दर अनन्त शक्तियाँ छिपी हैं। समस्याएं हमारे शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक तंत्र को मजबूत कर देती हैं। अगर ऐसा न हो तो हम इसका उपयोग अपने जीवन में नहीं कर पाएं।
सुपर स्टार अमिताभ बच्चन के जीवन में तमाम ऐसे मोड़ आये जब उनकी फिल्में लगातार असफल हो रही थीं। बैंक कर्ज के कारण उनका मुम्बई के जूहू स्थित बंगला नीलामी के कगार पर था। सौ से ज्यादा टीवी चैनल दिखा रहे थे कि ये अमिताभ का बंगला है, जो कि नीलाम होने जा रहा है। आप कल्पना कीजिए कि उस समय उस शख्स के दिल पर क्या बीत रही होगी? ‘कुली’ फिल्म की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन के पेट में ऐसी चोट लगी कि उन्हें महीनों ज़िन्दगी और मौत से जूझना पड़ा। डेढ़ सौ से अधिक लोगों ने उन्हें अपना रक्तदान किया, इस घटना के बाद उन्हें एक अजीब बीमारी हो गयी, जिसमें वे अपने शरीर व हाथ पैरों को हिला भी नहीं पाते थे, लेकिन ईश्वर पर आस्था और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर अमिताभ बच्चन ने सभी समस्याओं पर विजय प्राप्त की। अमिताभ बच्चन कहते हैं कि ‘‘हमारे मन की हो जाए तो अच्छा और हमारे मन की न हो तो भी अच्छा, क्योंकि ईश्वर कभी हमारा बुरा नहीं चाहता है। वह सदा हमारी भलाई के लिए कार्यरत है।’’ इसलिए भागें नहीं बल्कि समस्याओं का मुकाबला करें।
5. समस्याओं से घबराना छोडं़े, चुनौती के रूप में स्वीकारें
सोना तपकर ही निखरता है। रोने से बच्चे का बल बढ़ता है और उसका विकास होता है। हर समस्या के बाद आप और मजबूत बनकर उभरते हैं। समस्याऐं ज़िन्दगी के कोमा और फुलस्टाॅप हैं। इसके बाद आप और ज्यादा मजबूत होते हैं। इसलिए समस्याओं को वरदान मानें और चुनौतियांे के रूप में लें। ईश्वर द्वारा आपको समस्याएँ दिये जाने का मतलब है, उसे आपकी क्षमताओं पर भरोसा है और वह मदद के लिए भी तो खड़ा है। ईश्वर हमें कोई तौहफा या सम्भावना देता है तो वह उसे परेशानियों में छिपाकर रख देता है। वह देखना चाहता है कि उसके बच्चे परेशानियों में कैसा व्यवहार करेंगे? इसलिए समस्याओं को वरदान मानंे। ईश्वर अगर सुख देता है तो उसे प्रसाद मानो, अगर दुःख देता है तो उसे चुनौती के रूप में स्वीकारो।
ईश्वर को कभी ये मत बताओ कि आपकी परेशानियाँ कितनी बड़ी हैं बल्कि परेशानियों को यह बता दो कि आपका ईश्वर कितना बड़ा है? संकट और समस्याओं को जीवन का अनिवार्य अंग मानो और जब वह आये तो अपना सिर ऊपर उठाओ, आँख मिलाकर उसे देखो और कहो-‘मैं तुमसे अधिक बलवान हूँ, तुम मुझे पराजित नहीं कर सकतीं।’ ध्यान रखिए, संकट/समस्या आपकी सफलता की नींव है।
6. समस्या का हल सकारात्मक व वैध होना चाहिए
आप किसी समस्या से बचने के लिए दूसरी समस्या मोल न लें। सदा याद रखें- आप जो भी समस्या का समाधान सोचें, वह उचित सकारात्मक व वैध होना चाहिए। यानि कोई कार्य अनैतिक या गैर कानूनी या ऐसा नहीं होना जो बाद में परेशानी बन जाए।
7. समस्या में डूबें नहीं, हटकर सोचें
कभी-कभी हमें अपनी समस्या सुलझाने के लिए उसमें डूबने की नहीं, बल्कि खुद को अलग रखकर सोचने की जरूरत होती है।
अक्सर यह होता है कि समस्या हमारे सामने खड़ी होती है। समस्या होती है, तो हम उसे सुलझाने की कोशिश करते हैं। कभी-कभी यह होता है कि हम उस समस्या में अपने को इतना डुबो देते हैं कि बाहर निकल ही नहीं पाते। हम उसमें डूबे रहते हैं और बाहर निकलना चाहते हैं। हमें समझ में ही नहीं आता कि बाहर कैसे आना है? यह वक्त होता है, जब हमें अपने को खुद से काटने की जरूरत होती है। हमें अपनी समस्या पर एक बाहरी शख्स की तरह देखने की दरकार होती है। हमें एक मायने में अपने से दूरी बनानी होती है। कभी-कभी बहुत पास होने से हमें दिखलाई नहीं पड़ता। साफ देखने के लिए हमें थोड़ी-सी दूरी बनानी पड़ती है। यही समस्या के साथ होता है। यह हमारे इतनी पास होती है कि समस्या ही सही रूप में दिखाई नहीं पड़ती। हम उससे हल्की सी दूरी बनाते हैं, एक अलग नजरिये से देखते हैं और वह सुलझती नजर आती है।
दरअसल समस्या को कई तरह से देखा जा सकता है। हम जब उसमें फंसे होते हैं, तो हमारा एक नजरिया ही हावी होता है। वह हमें दूसरे कोण से सोचने ही नहीं देता। थोड़ा-सा अलग होते ही हम दूसरे नजरिये पर काम करते हैं और यहीं से समस्या की गुत्थियाँ सुलझने लगती हैं।
8. समस्या को अवचेतन मन या ईश्वर के हवाले कर दें।
समस्याओं के हर पहलू पर गंभीरता से विचार करें। उसका उचित व वैध समाधान खोजें जो भी हो सके वह प्रयास करें। यदि आप किसी हल पर नहीं पहँुच रहे हैं तो समस्याओं को अपने अवचेतन मन या ईश्वर के हवाले कर दें। वह आपको किसी घटना, व्यक्ति, विचार के माध्यम से समस्या का हल सुझा देगा।
संकट या समस्याओं से उबरने में प्रकृति या परमात्मा पर विश्वास-आस्था, ध्यान, प्रार्थना और सकारात्मक आत्म चर्चा भी बेहद कारगर साबित होते हैं।
9. संकट पर संकट
समुद्र के किनारे मछुआरों का एक गाँव था। एक शाम सभी मछुआरे अपनी-अपनी नावें लेकर मछली पकड़ने के लिए गहरे समुद्र में चले गए। जब रात गहराने लगी तब एक शक्तिशाली तूफान आ गया। मछुआरों की नावें अपना रास्ता भटक गईं और समुद्र में यहाँ-वहाँ बिखर गईं। उधर गाँवों में मछुआरों की पत्नियाँ, माँ और उनके बच्चे समुद्र तट पर आ गए और ईश्वर से अपने परिजनों को बचाने के लिए प्रार्थना करने लगे। वे सभी बड़े दुःखी थे और रो रहे थे। तभी एक दूसरा संकट आ पड़ा। एक मछुआरे की झोपड़ी में आग लग गई। चंूकि गाँव के सभी पुरुष मछली पकड़ने गये थे और महिलाएं समुद्र तट पर थीं, इसलिए कोई भी आग नहीं बुझा पाया। जब सुबह हुई, तो सबकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा, क्योंकि मछुआरों की नावंें सुरक्षित तट पर लग गई थीं। कोई भी दुःखी नहीं था, पर जिस मछुआरे के घर में आग लग गई थी, उसकी पत्नी ने अपने पति के मिलने पर उससे रोते हुए कहा, ‘हम बर्वाद हो गये, हमारा घर और सारा सामान आग में जलकर राख हो गया। उसका पति हँसकर बोला, ‘ईश्वर को उस आग के लिए धन्यवाद दो। रात में जलती हुई झोपड़ी को देखकर ही तो हम अपनी नावें किनारे पर लगा पाए।’
इसलिए जब भी हम पर संकट आ पड़े, तब हमें यह समझना चाहिए कि इसके कारण हम किसी बड़े संकट से बच गए हैं।
10. यह भी गुजर जाएगा
जो भी संकट या समस्या आपके सामने है। आपसे भी ज्यादा दुःख, संकट और समस्याएँ अन्य लोगों के सामने भी आयी हैं। समय परिवर्तनशील है। बुरे वक्त, दुःख व समस्याओं के वक्त आप ध्यान रखिए- ‘यह वक्त भी गुजर जाएगा’ ;और अच्छे वक्त में भी ‘यह वक्त भी गुजर जाएगा’ ध्यान रखिए।द्ध कुछ समस्याएं समय के साथ सुलझ जाती हैं।
अन्त में-
एक सुन्दर सपना और कदमों के निशान
एक रात मैंने एक सपना देखा।
मैं समुद्र तट पर ईश्वर के साथ चल रहा था।
काले आसमान पर मेरे जीवन के दृश्य उभरे।
हर दृश्य में मैंने
रेत में मैंने दो लोगों के निशान देखे,
एक मेरे पैर थे,
दूसरे ईश्वर के थे।
जब मेरे जीवन का आखिरी दृश्य मेरे सामने आया,
तो मैंने रेत में पैरों के निशानों की तरफ देखा।
वहाँ पर सिर्फ एक ही व्यक्ति के पैरों के निशान थे।
मुझे एहसास हुआ कि यह मेरे जीवन का
सबसे दुःखद और कष्टकारी समय था।
इससे मुझे चिंता हुई
और मैंने अपनी दुविधा के बारे में
ईश्वर से सवाल पूछ लिया।
‘‘ईश्वर, जब मैंने आपका अनुसरण करने का फैसला किया था,
तो आपने मुझसे कहा था,
मेरे साथ पूरे रास्ते चलो और बातें करो।
लेकिन मैं देख रहा हूँ कि मेरे जीवन के सबसे मुश्किल समय में
सिर्फ एक ही व्यक्ति के पैरों के निशान हैं।
मैं यह नहीं समझ पा रहा हूँ कि जब मुझे आपकी सबसे ज्यादा जरूरत थी,
तब आपने मेरा साथ क्यों छोड़ा।’’
उन्होंने फुसफुसाकर कहा, ‘‘मेरे प्यारे बच्चे,
मैं तुमको प्यार करता हूँ और तुम्हारे कष्टों तथा इम्तहानों में
कभी तुम्हारा साथ नहीं छोड़ूंगा।
जब तुमने सिर्फ एक पैर के निशान देखे थे,
तब मैं तुम्हें अपनी पीठ पर उठाकर ले जा रहा था।’’
-मार्गरेट फ़िशबैक पाॅवस
स

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