हनुमान गौतम उर्फ़ जख्मी राही
(तन्हाई)
1. तन्हाई उम्र गुजार दी तनहाई ने । तन्हाई तो ना मिली क्योंकि वह खुद थी तन्हाई में
2. बेशक आज उनकी यादें भी तन्हाई बनकर रह गई हम हमारे शहर में वह गांव में तन्हाई बन के रह गई
3. कोशिश खूब करी उनका सामना ना हो तन्हाई में कुदरत ने आग लगा दी उनकी बेबसी और तनहाई में
4. जब कहर बनकर दिल की तन्हाई रो पड़ी , बेबसी मैं हर दिल की मुस्कान रो पड़ी
5. जख्मी ने खूब समझाया हर दिल को तन्हाई में, अब झर झर हो रहा है ए वतन वो खुद तन्हाई में।।
लेखक हनुमान गौतम उर्फ जख्मी राही
8278620863





