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मोटिवेशन एवं आत्मविश्वास

मन के कार्य एवं शक्तियां

By HKSNEWS
July 21, 2026

पिछली सदी में जितनी भी खोजें हुई हैं। उनमें सबसे अधिक महत्वपूर्ण खोज मन की आश्चर्यजनक शक्ति एवं उसके उपयोग का ज्ञान है। जिस प्रकार कम्प्यूटर, मोबाइल, टेलिविजन आदि को प्रयोग करने का एक इंस्ट्रैक्शंस मैनुअल होता है ताकि हम उसके ज्यादा से ज्यादा फंक्शंस को समझ सकें और उसकी क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल कर सकें। ठीक उसी प्रकार हमारे माइंड का भी एक मैनुअल होता है। उसे समझकर हम माइंड के फंक्शंस को समझ सकते हैं तथा उसका ज्यादा से ज्यादा और बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं।
दरअसल आज तक दुनिया में जितने भी लोग सफलता की बुलन्दियों पर पहुंचे हैं। उन्होंने भी 5 प्रतिशत से ज्यादा अपने मन की शक्तियों का इस्तेमाल नहीं किया है। चाहे वह बिलगेट्स हों, अमिताभ बच्चन हों, धीरूभाई अंबानी हों या महान वैज्ञानिक अल्वर्ट आइंस्टीन। ये लोग भी 5 प्रतिशत से ज्यादा अपने मन की शक्तियों का प्रयोग नहीं कर पाये हैं।
मन के प्रकार
आदमी का मन तो एक ही होता है लेकिन इसके दो अलग-अलग पहलू या कार्य होते हैं। हर पहलू की पहचान इसके लक्षण से होती है। जो अपने आप में अनूठा होता है। दोनों में से प्रत्येक मन स्वतन्त्र रूप से काम करने में सक्षम होता है और मिलकर काम करने में भी। एक मन को हम चेतन मन कहते हैं क्योंकि यह बाहरी चीजों से सरोकार रखता है। दूसरे मन को हम अवचेतन मन कहते हैं। इस प्रकार दो मन होते हैं।
;1द्ध चेतन मन ;बवदबपवने डपदकद्ध
;2द्ध अवचेतन मन ;ैनइ बवदबपवने डपदकद्ध
जब तक हम चेतन या जाग्रत अवस्था में होते हैं तब तक हमारा चेतन मन काम करता है ;जैसे आप इस पुस्तक को पढ़ रहे हैंद्ध और जब हम सो जाते हैं या बेहोशी की अवस्था में होते हैं तब यह काम करना बंद कर देता है। हमारा अवचेतन 24 घंटे कार्यरत रहता है।
अब हमारा कौन-सा मन कार्यरत है? ……. दोनों मन, क्योंकि आप जाग्रत अवस्था में हैं। इसीलिए चेतन या जाग्रत मन काम कर रहा है ;आपके सोने के बाद यह कार्य नहीं करेगाद्ध और अवचेतन मन तो 24 घंटे कार्यरत रहता ही है इसलिए इस समय आपके दोनों मन कार्यरत हैं।
हमारे चेतन मन के पास 10 प्रतिशत ;सीमितद्ध शक्तियाँ हैं जबकि अवचेतन मन के पास 90 प्रतिशत ;अनंतद्ध शक्तियाँ हैं। अधिकांश लोगों को अवचेतन मन की शक्तियों और उसके प्रयोग के बारे में जानकारी नहीं है। जबकि हम अपने अवचेतन मन की शक्तियों का प्रयोग करके जीवन में सुख, स्वास्थ्य, सफलता, समृ(ि व वांछित चीजें प्राप्त कर सकते हैं।
चेतन मन के कार्य और उसकी शक्तियां
चेतन मन ;ब्वदबपवने डपदकद्ध
आपका चेतन मन आपका निरपेक्ष या सोचने वाला मस्तिष्क है। इसकी कोई याददाश्त नहीं होती और इसमें एक बार में एक विचार ही रह सकता है। इस मन के निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्य हैं।
स जानकारी को पहचानना;ेमदेमेद्ध
चेतन मन आने वाली जानकारी को पहचानता है। यह जानकारी हमारी पांच ज्ञानेन्दियों के माध्यम से आती है। जैसे देखकर, सुनकर, संूघकर या गंध लेकर, स्वाद लेकर और स्पर्श या भावना का अनुभव करके। हमारी पांचों ज्ञानेन्द्रियों ;ैमदबेमद्ध पर चेतन मन का नियन्त्रण रहता है। जिसके द्वारा हम बाहर के वातावरण के साथ निरन्तर संपर्क में रहते हैं।
आपका चेतन मन आपके चारों ओर होने वाली हर चीज़ को लगातार देख रहा है और श्रेणी में रख रहा है। उदाहरण के लिए, कल्पना करें कि आप फुटपाथ पर चल रहे हैं और सड़क पार करने का फैसला करते हैं। आप फुटपाथ से नीचे कदम रखते हैं। उसी पल आप कार के इंजन की तेज़ आवाज़ सुनते हैं। आप तत्काल मुड़ते हैं और आने वाली कार की दिशा में देखकर पता लगाते हैं कि आवाज़ क्या है और कहाँ से आ रही है। यह पहला काम है।
स तुलना करना;श्रनकहपदहद्ध
आपके चेतन मन का दूसरा काम तुलना करना है। यह तुलना आपको जानकारी और अनुभवों से की जाती है। किसी व्यक्ति या परिस्थिति के बारे में तुलना या अनुमान लगाना चेतन मन का काम है।
आपने जो कार देखी है और जिसकी आवाज़ सुनी है, उसकी जानकारी तत्काल आपके चेतन मन में पहुँच जाती है। वहाँ, इसकी तुलना कारों से संबंधित आपकी पुरानी संगृहीत जानकारी व अनुभवों से की जाती है।
उदाहरण के लिए, अगर कार एक ब्लाॅक दूर है और तीस मील प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही है, तो आपका अवचेतन स्मृति बैंक बता देगा कि कोई ख़तरा नहीं है और आप आगे बढ़ना जारी रख सकते हैं।
लेकिन यदि कार आपकी ओर साठ मील प्रति घंटे की रफ्तार से आ रही है और सिर्फ सौ गज़ दूर है, तो आपको तत्काल ‘‘ख़तरे’’ का संदेश मिलेगा, जो आपको पीछे हटने के लिए प्रेरित करेगा।
स गतिविधियां ;डवअमउमदजेद्ध
हमारी गतिविधियों-चलना, उठना, बैठना, बोलना, कार्य करना आदि- पर हमारे चेतन मन का नियन्त्रण होता है। जिसके द्वारा हम निरन्तर क्रियाशील रहकर अपने दैनिक जीवन के कार्य करते रहते हैं।
स विचार करना ;जीपदापदहद्ध
जाग्रत अवस्था में हम निरन्तर विचारशील रहते हैं। इसमें एक बार में एक ही विचार ;सकारात्मक या नकारात्मकद्ध रह सकता है। विचार करना चेतन मन का कार्य है।
स तर्क करना ;सवहपबद्ध
जाग्रत मन ही तर्क कर सकता है। विचारों के साथ तर्क-वितर्क जुड़े होते हैं। तर्क-वितर्क करना या व्याख्या करने का कार्य भी चेतन मन करता है।
स विश्लेषण करना ;।दंसलेपेद्ध
आपके चेतन मन का काम विश्लेषण करना है। कई बार निर्णय लेने से पहले परिस्थितियों का विश्लेषण ;।दंसलेपेद्ध करना होता है। विश्लेषण करने का कार्य भी चेतन मन ही करता है। विश्लेषण हमेशा निर्णय लेने से पहले आता है।
आपका चेतन मन काफ़ी हद तक एक बाइनरी कम्प्यूटर की तरह काम करता है, जो दो कार्य करता हैः यह चुनाव करने और निर्णय लेने में डाटा को स्वीकृत या अस्वीकृत करता है। यह एक बार में एक ही विचार से निबट सकता है: सकारात्मक और नकारात्मक, ‘‘हाँ’’ या ‘‘नहीं’’। यह लगातार तस्वीरों की श्रेणियों में बाँटता है और निर्णय करता है कि आपके लिए क्या प्रासंगिक है और क्या नहीं।
स निर्णय लेना;ज्ंापदह क्मबपेपवदद्ध
कोई भी कार्य करने से पहले आपका चेतन मन निर्णय करता है और यह निर्णय हमारी जानकारी ;विचारोंद्ध तुलना या अनुमान तथा विश्लेषण करने के बाद लिया जाता है। निर्णय लेने का काम चेतन तन ही करता है।
आप सड़क पर जाते हैं, चलती हुई तेज़ आवाज़ की कार सुनते हैं और देखते हैं कि वह आपकी तरफ तेज़ी से आ रही है। कारों की गति के ज्ञान के कारण आपका विश्लेषण बता देता है कि आप ख़तरे में हैं और किसी निर्णय की ज़रुरत है। आपका पहला सवाल है, ‘‘क्या मैं रास्ते से हट जाऊँ? हाँ या नहीं?’’ अगर निर्णय ‘‘हाँ’’ है, तो आपका अगला सवाल है, ‘‘ क्या मैं आगे कूँदू या नहीं? हाँ या नहीं? अगर क्राॅस ट्रैफिक के कारण निर्णय ‘‘नहीं’’ है, तो आपका अगला सवाल होता है, ‘‘क्या मैं पीछे कूदूँ’’ हाँ या नहीं,’ अगर आपका निर्णय ‘‘हाँ’’ है, तो यह संदेश तत्काल आपके अवचेतन दमन को पहुँचा दिया जाता है और एक पल से भी कम समय में आपका पूरा शरीर रास्ते से हट जाता है, जिसमें आपको कोई अतिरिक्त विचार नहीं करना पड़ा या निर्णय नहीं लेना पड़ा।
यह सोचने के लिए आपको चेतन मन का इस्तेमाल नहीं करना पड़ा कि आपको अपना दायाँ पैर पहले रखना चाहिए या बायाँ पैर। एक बार जब आपके चेतन मन ने अवचेतन मन को आदेश दे दिया, तो सभी ज़रुरी नसों और मांसपेशियों में तालमेल हो गया और पलक झपकते ही निर्णय का पालन हो गया।
स अमल करना
निर्णय लेने के पश्चात् हम उसके अनुसार कार्य की शुरूआत करते हैं यानि अमल में लाते हैं। निर्णय को अमल में लाने का कार्य भी चेतन मन ही करता है।
स बु(िमता का अंक/आई क्यू ;प्दजमससमहमदबम ुनवजपमदजद्ध
किसी भी व्यक्ति की सफलता के आंकलन के लिए उसके दिमाग की ताकत और सोचने की क्षमता को निर्धारित परीक्षा पद्वति ;प्फद्ध काम में लायी जाती है। आईक्यू ;प्फद्ध चेतन मन के पास है।
अवचेतन मन के कार्य और उसकी शक्तियां
अवचेतन मन ;ैनइ ब्वदबपवने डपदकद्ध
आपका अवचेतन मन असीमित शक्तियों का भण्डार है। लेकिन वह स्वतन्त्र रूप से सोच-विचार नहीं करता, न ही वह तर्क करता है। वह तो सिर्फ चेतन मन से मिले आदेशों -सूचनाओं, निर्देश-सुझाव आदि का पालन करता है। आपका अवचेतन मन ऐसा सेवक है, जो बिना सवाल पूछे दिन-रात काम करता रहता है।
आपके चेतन मन को माली के रूप में माना जा सकता है, जो बीज बोने का कार्य करता है, इसी प्रकार आपका अवचेतन मन वह उपजाऊ मिट्टी ;या बगीचाद्ध है। जहां बीज उगते तथा बड़े होते हैं।
1. संवेदना पर नियन्त्रण
वैसे तो हमारी पांचों ज्ञानेन्द्रियांे द्वारा सूचना व संवेदना पर चेतन मन का नियन्त्रण होता है, लेकिन जब हम सो जाते हैं। तब भी कुछ अंशों तक हमारी संवेदना चलती रहती है। तब भी कुछ जल रहा हो, गंध आ रही हो, फोन की घंटी बज रही हो… आदि तो हमारी नींद खुल जाती है। हम जाग जाते हैं। चेतन मन की अनुपस्थिति में अवचेतन मन हमारी संवेदना पर नियन्त्रण रखता है।

2. अवचेतन गतिविधियां
हमारी क्रियाओं और गतिविधियांे पर मुख्य रूप से चेतन मन का नियन्त्रण रहता है। लेकिन सुप्त अवस्था में करवट बदलना या मच्छर के काटने पर उसे हटाने के लिए हाथ आगे बढ़ाना आदि ऐसी गतिविधियां हैं, जिन पर चेतन मन के साथ-साथ अवचेतन मन का भी नियन्त्रण होता है।
3. स्मृतियों का विशाल बैंक/स्मरण शक्ति का भण्डार
अगर मैं आपसे पूछूं कि परसों शाम आपने क्या-क्या खाया था? तो आपको चेतन मन सबसे पहले अवचेतन मन की ‘मेमोरी बैंक’ में जाएगा तथा फिर ‘सर्च’ करके बताएगा कि आपने क्या-क्या खाया था। आपकी अवचेतन स्मृति लगभग आदर्श होती है। संदिग्ध तो आपकी चेतन स्मृति होती है।
आपका अवचेतन मन स्मृतियों के विशाल बैंक जैसा है। इसकी क्षमता लगभग असीमित है। यह आपके साथ होने वाली हर घटना को स्थायी रुप से सँभालकर रखता है। इक्कीस साल की उम्र तक आपका अवचेतन मन पूरे एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका से सौ गुनी ज़यादा सामग्री स्थायी रुप से इकट्ठा कर चुका होता है। सम्मोहन के दौरान लोग पचास साल पहले हुई घटनाओं को भी अक्सार पूरी स्पष्टता से याद कर सकते हैं। स्मृति के मामले में अवचेतन मन की तुलना आधुनिक कम्प्यूटर से की जा सकती है।
4. स्वचालित चेतना तंत्र पर नियन्त्रण
;ब्वदजतवस व िंनजवदवउवने दमतअवने ेलेजमउद्ध
हमारे शरीर निर्वाह के लिए बहुत सी क्रियाएं स्वतः ;।नजवउंजपबंसलद्ध चलती रहती हैं। जैसे-हम सांस लेते रहते हैं ; अभी आपको पता भी नहीं था कि आप सांस ले रहे हैं।द्ध हमारा दिल धड़कता रहता है। हमारा खाना पच जाता है। पाचन तंत्र, रूधिर, संचरण तंत्र, श्वसन तंत्र, उत्सर्ग तंत्र, प्रजनन तंत्र, आदि क्रियाओं को चलाने और उन पर नियन्त्रण रखने की शक्ति अवचेतन मन के पास है।
आपके अवचेतन मन के पास एक होमियोस्टेटिक आवेग होता है। वह आपके शरीर के तापमान को 98.6 डिग्री फैरेन हाइड पर स्थिर रखता है। आपकी सांसों को नियमित रखता है। और आपके हृदय को निश्चित दर से धड़काता है। ृ ‘आॅटोनाॅमिक नर्वस सिस्टम’ द्वारा यह आपकी कई विलियन कोशिकाओं में सैकड़ों रसायनों ;ब्ंउपबंसेद्ध के बीच संतुलन बनाए रखता है। ताकि आपके शरीर की पूरी ‘मशीनरी’ ज्यादातर समय पूरे सामंजस्य के साथ काम करती रहे।
यदि गलत आहार-विहार व विचारों के कारण ‘मशीनरी’ में कोई गड़बड़ पैदा हो, तो वह बीमारी के रूप में बाहर आती है। अवचेतन मन ‘फालतू कचरे’ को निकालकर बीमारी या गड़बड़ को दूर करने की कोशिश करता है तथा उसे फिर से ठीक ;सही व स्वस्थद्ध करता है।
शारीरिक विकास ;ठवकल ळतवूजीद्ध
जब बच्चे का जन्म होता है, तब वह बेहद छोटा और काफी कम वजन;दो-ढाई किलोद्ध का होता है। बाद में उसका जो शारीरिक विकास होता है, उस पर अवचेतन मन का नियन्त्रण है। हमारे शरीर में प्रतिदिन नए-नए कोष उत्पन्न होते हैं। जिसकी वजह से हमारी शारीरिक वृ(ि व विकास होता है। यह प्रक्रिया 24 घंटे -यदि कोई व्यक्ति बेहोश ;ब्वउंद्ध में है, तब भी- चलती रहती है। स्पष्ट है शारीरिक वृ(ि पर अवचेतन मन का नियन्त्रण है।
स्वास्थ्य सुधार या इलाज ;भ्मंसपदहद्ध
जहां कोई दवा या डाॅक्टर काम नहीं कर पा रहे हों, वहां अवचेतन मन की शक्ति द्वारा सुधार और इलाज संभव है।
हमारे शरीर में जब घाव हो जाता है और शरीर के किसी कोष को नुकसान होता है। तब अवचेतन मन घाव भरने की प्रक्रिया शुरू करता है। हम अवचेतन मन की शक्ति द्वारा घाव को या किसी भी बीमारी के ठीक होने की प्रक्रिया को धीमी या गतिशील बना सकते हैं।
दर्द पर नियन्त्रण ;ब्वदजतवस वअमत चंपदद्ध
किसी व्यक्ति को सम्मोहित करके उसकी दर्द रहित शल्यक्रिया ;व्चमतंजपवदद्ध की जा सकती है। या किसी महिला का पीड़ा रहित प्रसव ;पेनलेस डिलीवरीद्ध कराया जा सकता है। जानते हो कैसे? दरअसल हिप्नोटिस्ट संबन्धित व्यक्ति के चेतन मन को शांत करके अवचेतन मन को यह सूचना भेज देता है कि ‘आपको बिलकुल दर्द नहीं हो’ हो रहा है, आपको दर्द सम्पूर्ण रूप से दूर हो गया है। और अवचेतन मन प्राप्त सूचना के मुताबिक शरीर के दर्द को सम्पूर्ण रूप से दूर कर देता है। इस प्रकार प्रसव या आॅपरेशन बिना किसी बेहोशी दवा या दर्दनाशक दवा के हो जाता है। दर्द पर नियन्त्रण की शक्ति अवचेतन मन के पास है।
रोग प्रतिरोधक शक्ति ;प्उउनदपजल च्वूमतद्ध
किसी भी घटना, परिस्थिति या व्यक्ति के सम्बन्ध में आपके विचार और भावनाएं सकारात्मक या नकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं। हमारे सकारात्मक या नकारात्मक दृष्टिकोण का असर हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ता है। रोग प्रतिरोधक शक्ति का नियन्त्रण अवचेतन मन के पास है। इसलिए रोग प्रतिरोधक शक्ति के कण बढ़ाने के लिए सकारात्मक मानसिक नजरिया ;च्वेपजपअम डमदजंस ।जजपजनकमद्ध अपनाएं। यु( में जो देश हार जाता है, उसके सैनिकों के घाव, जीतने वाले देश के सैनिकों के मुकाबले देर से भरते हैं।
रोग प्रतिरोधक शक्ति यानी बैक्टीरिया और वायरस से प्रतिरक्षा नकारात्मक सोच भी बहुत बड़ा ‘बैक्टीरिया’ और वायरस है। पाॅजिटिव रहोगे तो रोगों से भी दूर ही रहोगे।
इच्छा मृत्यु ;ब्वदजतवस व िक्मंजीद्ध
आप कितने वर्ष जिन्दा रहना चाहते हैं? 60 वर्ष, 80 वर्ष या 100 वर्ष या इससे भी अधिक? आप जितने वर्ष भी जीवित रहना चाहते हैं। आपको उस आयु सीमा ;।हम सपउपजद्ध को अपने अवचेतन मन में ‘सेट’ करना होगा। आपको कब, कहां और किस प्रकार की मृत्यु चाहिए, आप यह भी निश्चित कर सकते हैं। इच्छामृत्यु का निमन्त्रण भी अवचेतन मन के पास है। महाभारत में भीष्म पितामह इच्छामृत्यु का सशक्त उदाहरण है।
पहले मैं भी 50 वर्ष से अधिक जीना नहीं चाहता था, लेकिन जैसे ही मुझे ज्ञात हुआ कि प्रकृति ने भी यह शरीर 100 वर्ष की ‘एक्सपायरी डेट’ के साथ दिया है और हम इच्छामृत्यु को प्राप्त कर सकते हैं। यानी जब हम मरना चाहें, मर सकते हैं या जब तक जीवित रहना चाहे जीवित रह सकते हैं…..। मैंने भी अपनी आयु सीमा बढ़ाकर अपने अवचेतन मन में ‘सेट’ कर ली तथा अपने जीवन के प्रयोजन को ‘मानवता व समाजहित’ में पूरा करने में लगा हुआ हूॅ। आप भी अपनी आयु ‘सेट’ कर सकते हो।
मानसिक घड़ी ;डमदजंस ब्सवबाद्ध
आपको सुबह पांच बजे की टेªन से कहीं बाहर जाना है। सुबह साढ़े तीन बजे उठकर, तैयार होकर स्टेशन पहुँचना है। आप अलार्म घड़ी में साढ़े तीन बजे का अलार्म सेट करके सो जाते हैं। दूसरा तरीका है अपने अवचेतन मन को निर्देश देकर सोना कि ‘मुझे साढ़े तीन बजे उठना है। अलार्म घड़ी की तरह हमारे अवचेतन मन में एक घड़ी होती है। वह निर्धारित समय पर हमें जगा देती है। अवचेतन मन आपको अपनी प्रोग्रामिंग करने में समर्थ बनाता है, ताकि आप भविष्य में किसी निश्चित समय पर कोई काम करना याद रख सकें। जैसे आप अपने मन की प्रोग्रामिंग कर सकते हैं कि वह आपको दिन या रात में किसी निश्चित समय पर जगा दे। कई लोग कभी अलार्म घड़ी का इस्तेमाल नहीं करते, इसके बावजूद सही समय पर उठ जाते हैं ;मैंने स्वयं आजतक अलार्म घड़ी का प्रयोग नहीं किया है और अपने द्वारा निर्धारित समय पर -जितने बजे भी कहीं जाना हो, उसके मुताबिक- निर्धारित समय पर उठ जाता हूॅ तथा गतंव्य को प्रस्थान करता हॅू। वैसे भी रोजाना 3.00 बजे स्वतः ही मेरी आंख खुल जाती है, भले ही मैं कितने भी बजे सोउळंद्ध
आपको तो अपनी मानसिक अलार्म घड़ी का उपयोग करने के लिए बस तय करने की जरूरत है कि आप सुबह ;या कभी भीद्ध कितने बजे उठना चाहते हैं, फिर इसके बारे में भूल जाएं और ठीक उसी समय या उससे कुछ मिनट पहले आपकी नींद खुल जपाएगी।
आप खुद को निश्चित समय पर फोन करने या घर जाते समय कोई चीज लेने की याद दिला सकते हैं। प्रोग्रामिंग वाला विचार सही समय या जगह पर आपके मन में आ जाएगा। आप इस का इस्तेमाल बस इसका फैसला लेकर कर सकते हैं। अपने जीवन में आप इस घड़ी की सेवाओं का लाभ लेते रहिए।
मानसिक कलेण्डर ;डंदजंस ब्ंसमदकमतद्ध
जिस प्रकार अवचेतन मन के पास मानसिक घड़ी की सुविधा है, ठीक उसी प्रकार मानसिक कलेण्डर की भी सुविधा है, अवचेतन मन समयब( तरीके से अपनी शक्ति का परिचय देता है। गर्भस्थ शिशु नौ माह दस दिन के बाद ही जन्म लेता है। अवचेतन मन मानसिक कलेण्डर में ही समय निश्चित करता है। यदि आप भी अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की समय सीमा रखेंगे, तो आपका अवचेतन मन उतने ही समय में ;कलेण्डर की समय सीमा के मुताबिकद्ध आपको आपके लक्ष्य प्राप्त करवा देगा।
ईश्वर आपके अन्दर है/व्यक्तिगत ईश्वर
प्राचीन यूनान की एक कहानी है। संसार बनाते वक्त माउंट आॅलंपस पर बहुत से देवता बैठे थे। उन्होंने धरती और इंसान को बना दिया था, पक्षियों और जानवरों, समुद्री जीवों, पौधों और फूलों व सारे प्राणियों को भी बना दिया था। सिर्फ एक चीज बची थी, और वह थी जीवन के रहस्य को किसी ऐसी जगह छिपाना, जहां इसका पता तब तक न चल पाए, जब तक कि व्यक्ति अपनी चेतना का विकास और विस्तार न कर ले यानी जब तक कि वह उसके लिए तैयार न हो जाए।
देवताओं के बीच काफी बहस हुई कि जीवन का रहस्य कहाँ छिपाना चाहिए। एक ने कहा, ‘चलो, हम इसे सबसे उळँचे पर्वत पर छिपा देते हैं। मनुष्य इसे वहाँ कभी नहीं खोज पाएगा।’ लेकिन दूसरे देवता ने जवाब दिया, ‘हमने मनुष्य में असीम जिज्ञासा और महत्वाकांक्षा भरी हैऋ वह अंततः सबसे ऊँचे पर्वत पर भी पहुँच जाएगा।’
फिर एक ने सुझाव दिया कि जीवन के रहस्य को सबसे गहरे समुद्र की तलहटी में छिपाना चाहिए। इस पर एक और देवता ने कहा, ‘हमने मनुष्य में असीमित कल्पना और अपना जगत खोजने-समझने की ज्वलंत इच्छा भरी है। देर-सबेर मनुष्य सबसे गहरे समुद्र की तलहटी तक भी पहुँच जाएगा।’
आखिर एक देवता ने समाधान देते हुए कहा, ‘चलो हम जीवन के रहस्य को उस आखिरी जगह छिपाते हैं, जहाँ इंसान इसकी तलाश करेगा – एक ऐसी जगह, जहाँ वह सिर्फ तभी पहुँचेगा, जब वह बाकी सारी संभावनाओं की तलाश कर लेगा और आखिरकार इसके लिए तैयार होगा।’
बाकी देवताओं ने पूछा, ‘वह जगह कौन सी है?’ इस पर पहले देवता ने जवाब दिया, ‘‘हम इसे इंसान के हृदय की गहराई में छिपाएंगे।’’ और उन्होंने ऐसा ही किया।
पाँच हजार सालों के इतिहास में हर सभ्यता के कुछ सबसे समझदार लोगों युगों-युगों के रहस्य की कुंजी खोजने की कोशिश की है, जिससे वे हर इंसान के भीतर गहराई में छिपे क्षमता के विशाल खजाने का ताला खोल सकें। उन्होंने संस्थाएं बनाईं, गोपनीय समूह बनाए और निजी समुदाय बनाए, जो आखिरी और सबसे पहली सरहद खोजने के प्रति समर्पित थेः मानवीय मस्तिष्क की आंतरिक शक्तियाँ।
अवचेतन मन आपका निजी ईश्वर है आपके अन्दर आपका अवचेतन मन परमात्मा ;ळवकद्ध का ही स्वरूप है। जो निजी ईश्वर के रूप में आपको संभालता है, आपको आशा प्रदान करता है तथा आपका मार्गदर्शन करता है।
समस्याओं का समाधान
आपके अवचेतन मन के पास हर समस्या का समाधान है। इसके लिए आपको अपने अवचेतन मन से मार्गदर्शन प्राप्त करना होगा। सभी समस्याओं के जबाव आपके अन्दर हैं। आपका अवचेतन मन आपकी सभी समस्याओं का हल सुझाएगा। ध्यान रखिए, हर समस्या का एक आदर्श समाधान होता है।
अवचेतन मन से मार्गदर्शन पाने की विधि
जब आपको कोई मुश्किल निर्णय लेना हो या जब आप अपनी समस्या का समाधान न देख पा रहे हों, तो तत्काल इसके बारे में सृजनात्मक सोचने लगें। अगर आप भयभीत और चिंतित रहेंगे, तो आप सचमुच सोच नहीं पाएंगें। सच्ची सोच डर से मुक्त होती है। यहाँ पर एक आसान तकनीक दी जा रही है, जिसके द्वारा आप किसी भी विषय पर मार्गदर्शन पा सकते हैं।
मस्तिष्क को शांत कर लें और शरीर को स्थिर कर लें। शरीर को आराम से रहने को कहेंऋ इसे आपका आदेश मानना ही पड़ेगा। इसकी कोई इच्छा, पहल या आत्म-चेतना नहीं होती है। आपका शरीर सिर्फ एक भावनात्मक डिस्क है, जो आपके विश्वासों और तस्वीरों का रिकाॅर्ड रखती है।
अपने ध्यान को गतिशील कर लें। अपने विचार समस्या के समाधान पर केन्द्रित कर लें।
इसे अपने चेतन मन से सुलझाने की कोशिश करें।
सोचें कि आप आदर्श समाधान पर किस तरह खुशी जाहिर करेंगे। अगर आपको आदर्श जवाब इसी समय मिल जाए, तो कल्पना करें कि आपको कैसा लगेगा।
अपने मस्तिष्क को खुशी और संतुष्टि के इस मूड से शिथिल तरीके से खेलने दें, फिर सो जाएं।
जागने पर अगर आपको जवाब नहीं मिले, तो किसी दूसरे काम में जुट जाएं। संभव है, किसी दूसरे काम में व्यस्त रहने पर जवाब खुदबखुद आपके दिमाग में आ जाए।
अवचेतन मन से मार्गदर्शन पाने में आसान तरीका ही सबसे अच्छा है।
मागदर्शन या सही कर्म का रहस्य मानसिक रूप से खुद को सही जवाब के प्रति निष्ठावान बनाना है। जब तक कि आपको अपने भीतर इसकी प्रतिक्रिया न मिल जाए। प्रतिक्रिया एक भावना है, एक आंतरिक एहसास है, एक सशक्त संकेत है। इसके द्वारा आप जान जाते हैं कि आपको जवाब मिल गया है। प्रयोग करने लगी है। अपने भीतर की इस व्यक्तिनिष्ठ बु(िमत्ता के मार्गदर्शन में काम करते समय आप असफल नहीं हो सकते या एक भी गलत कदम नहीं उठा सकते। आप पाएंगे कि आपके सभी काम खुशी से भरे होंगे और आपको रास्ते भर शांति मिलेगी।

दिव्य योजना ;कपअपदम च्संदपदहद्ध
आपने ‘डंद चतवचवेमे ंदक हवक कपेचवेमे’ कहावत सुनी होगी? यानि इंसान सोचता कुछ है और ईश्वर करता कुछ कुछ है।
चेतन मन योजना बनाता है, लेकिन अवचेतन मन की योजना दिव्य होती है। चेतन मन की योजना असफल हो सकती है जबकि अवचेतन मन की योजना कभी असफल नहीं होती है।
प्रकृति या ईश्वर ने योजना बनाने की शक्ति अवचेतन मन को दी है। योजना बनाने की शक्ति अवचेतन मन को दी है। योजना के अनुरूप वातावरण सृजित करने का काम भी अवचेतन मन करता है। मतलब चेतन मन द्वारा बनाई गई योजना यदि अवचेतन मन को यदि मंजूर न हो तो वह उसके अनुरूप वातावरण सृजित नहीं करता है। इस वजह से कार्य में असफलता ही हाथ लगती है। इसलिए सफलता प्राप्ति के लिए यदि योजना ;च्संदपदहद्ध अवचेतन मन द्वारा की जाए, तो सफलता निश्चित है।
एस.क्यू ;स्पिरिटच्युअल क्वाॅशन्टद्ध
एस.क्यू. यानि आध्यात्मिक अंक ;स्पिरिटच्युअल क्वाॅशन्टद्ध हमारे सि(ांतों, आदर्शों, मूल्यों एवं आदर्श व्यवहार व कार्यों को मापने का तरीका है इसकी उपयोगिता एवं मूल्य आई.क्यू. ;प्ण्फण्द्ध से अधिक है। स्वामी विवेकानन्द, महात्मा गांधी, विनोवा भावे, आदि व्यक्तियों का एस.क्यू. उळंचे दर्जे का था। आई क्यू., एस.क्यू. के अलावा ई.क्यू.;इमोशन क्वाॅशन्टद्ध भी होता है। जहां आई.क्यू. की शक्ति आपको जीनियस बनाती है, वहीं ई.क्यू. की बदौलत आप कहीं ज्यादा लोकप्रिय, उच्च मानवीय गुणों से युक्त, अच्छे प्रेरक एवं सहयोगी व्यक्ति के रूप में निखरते हैं। जिसका सफल होना तय होता है। लेकिन अधिकांश लोग केवल आई.क्यू. की ही चिंता करते हैं। ई.क्यू. और एस.क्यू. के बारे में उन्हें ज्यादा बोध नहीं होता है। अभिनेत्री मर्लिन मुनरो, अभिनेता गुरूदत्त एवं दिव्या भारती तथा राजनयिक हिटलर का आई.क्यू. बहुत ज्यादा था। फिर भी इन लोगों ने आत्महत्या की। अगर आई.क्यू. की महत्ता ज्यादा होती तो शायद ऐसा नहीं होता? एस.क्यू. एवं ई.क्यू. का महत्व आई.क्यू. से ज्यादा है। इनके उचित प्रयोग एवं सामंजस्य से ही वांछित सफलता संभव है। एस.क्यू. अवचेतन मन का क्षेत्र है।
टेलीपैथी
जैसे एक मोबाइल से दूसरे मोबाइल पर हम ैडै भेजते हैं। ठीक उसी प्रकार हम विश्वभर में कहीं भी दूसरे व्यक्ति को, ;यहां तक कि जानवरों, पशु-पक्षियों आदि को भीद्ध संदेश भेजकर अपना मनचाहा कार्य करवा सकते हैं, रोगियों को ठीक कर सकते हैं। हिंसक जानवरों को पालतू बना सकते हैं। लोगों को आकर्षित कर सकते हंै। आदि आदि अवचेतन मन ‘संदेश’ के आदान-प्रदान हेतु एक प्रतिनिधि ;।हमदजद्ध का कार्य करता है।
जो भी विचार या भाव आप संबंधित व्यक्ति के मन में भेजना या प्रोजेक्ट करना चाहते हैं, उसका मनोचित्रण ;विजुलाइजेशनद्ध करते हुए, संदेश को संबन्धित व्यक्ति को भेजना ही टेलीपैथी कहलाता है। रेकी, प्राणिक हीलिंग, डाउजिंग या अन्य प्राण उळर्जा के उपयोग की दुनिया भर में जितनी भर उपचार तकनीकें हैं। उनमें टेलीपैथी के कारण ही हम उपचारात्मक प्राण उळर्जा को दुनिया में किसी भी व्यक्ति को भेजकर हम उसे शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक व आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ कर सकते हैं। दर्द से तड़पते लोगों को राहत दे सकते हैं।
जिन लोगों से हमारा भावनात्मक या आत्मीय रिश्ता होता है और हम उन्हें याद करते हैं तभी वे स्वयं, उनका पत्र या फोन आ जाता है। हमारी तीव्र भावनाएं संबंधित व्यक्ति को आकर्षित करती हैं और जो विचार हमें आते हैं, वही विचार संबंधित व्यक्ति के मन में आते हैं। यही टेलीपैथी है। टेलीपैथी की शक्ति अवचेतन मन के पास है।
अन्तरात्मा की आवाज ;ब्वदेबपमदबमद्ध
अब भी हमारे मन में कोई गलत काम करने का विचार आता है, तो हमारी अंतर आत्मा की आवाज हमें ऐसा करने से रोकती है। अन्तरात्मा की आवाज दरअसल अवचेतन मन की आवाज है। ;हमारी अंतरात्मा सदैव सही मार्ग पर चलने को प्रेरित करती हैद्ध जो चेतन मन को गलत काम करने से रोकने के लिए एक चेतावनी है। इस चेतावनी को गंभीरता से लेना या इसकी अवहेलना करना चेतन मन का कार्य है। हमें कोई भी कार्य या विचार अन्तरात्मा के विरू( नहीं करना चाहिए।
ज्ञान का खजाना ;जतमंेनतम व िादवूसमकहमद्ध
हमारा अवचेतन मन त्रिकाल दर्शी है, यानि उसे भूत, भविष्य एवं वर्तमान का संपूर्ण ज्ञान है। नोस्ट्रोडमस ;छवेजतंकंउनेद्ध नामक एक व्यक्ति ने भविष्यवाणियां की थीं। जो कि नोस्टर्ड डायस की भविष्यवाणियां, नामक पुस्तक में भविष्यवाणियां आज तक सच साबित हो रही हंै। महाभारत में सहदेव की चर्चा आती है, वह भी त्रिकाल ज्ञानी थे। हमारा अवचेतन मन ज्ञान का भण्डार है। उसमें तीनों कालों-भूत, भविष्य एवं वर्तमान-का ज्ञान भरा पड़ा है। आवश्यकता उसे जाग्रत करने की है।
प्रज्ञा/समझदारी/बु(िमानी ;ॅपेकवउद्ध
जीवन की विभिन्न कठिन व जटिल परिस्थितियों में ‘सही समय पर सही निर्णय’ लेना समझदारी है। इसके लिए हमारा अवचेतन मन मार्गदर्शन करता है। प्रज्ञा/समझदारी अवचेतन मन का विषय है।
अवसर पैदा करना ;ब्तमंजपवद व िव्चचवतजनदपजपमेद्ध
आप जो भी बनना, करना या पाना चाहते हैं, उसके अनुरूप अवसर खड़े करना अवचेतन मन का कार्य है। आपको बस, अपने अवचेतन मन में लक्ष्य ‘सेट’ करना है। वह आपके समक्ष अवसर पैदा करेगा तथा चेतन मन को सूचित करेगा। आपको इन अवसरों को ‘झपटना’ है। जिससे आपके लक्ष्यों की प्राप्ति होगी। चेतन मन को अवसरों को पहचान कर उप पर पूर्ण निष्ठा व समर्पण से कार्य करना है।
पावर जनरेटर ;च्वूमत ळमदमतंजवतद्ध
हमें कार्य करने की शक्ति भोजन से मिलती है। डाॅक्टर्स के मुताबिक व्यक्ति एक महीने तक भूखा प्यासा रह सकता है। लेकिन प्रहलाद जैन एक ऐसे शख्स हैं, जो 70 साल से बगैर कुछ खाए पिए जीवित हैं। 45 डाॅक्टर्स की टीम उनकी जांच कर चुकी है कि आखिर वह कैसे जिंदा हैं। एनर्जी का जनरेटर हमारा अवचेतन मन है। यदि एक बार आप किसी कार्य को करने का संकल्प कर लें, तो आपका अवचेतन मन उस संकल्प के लिए आवश्यक शक्ति उत्पन्न करने का जनरेटर चालू कर देता है।
पश्चिमी बंगाल के सोहंग स्वामी शेरों तथा खतरनाक जंगली जानवरों पर निहत्थे आफत बन कर टूट पड़ते थे तथा उनके भय से जंगली जानवर दुम दवाकर भागते नजर आते थे। सोहंग स्वामी की जंगली जानवरों से लड़ने की संकल्प शक्ति के मुताबिक उनका अवचेतन मन उनमें शक्ति उत्पन्न कर देता था।
सृजनात्मक विचार ;ब्तमंजपअम ज्ीपदापदहद्ध
नए-नए एवं सृजनशील विचार, उत्पन्न करने की शक्ति अवचेतन मन के पास है। अवचेतन मन समस्त शु( रचनात्मकता का स्रोत है, लेख, संगीत, गीत, फिल्में, कलाकृति, नए आविष्कार, वैज्ञानिक क्रांतियां, समस्त प्रेरणा एवं रोमांच का अवचेतन मन सृजक एवं जन्मदाता है। तमाम लेखकों, वैज्ञानिकों, गीत एवं संगीतकारों, कलाकारों, आविष्कारकर्ताओं ने यह स्वीकार किया है कि उनकी रचनाओं ;या जो भी सृजन या आविष्कार किया हैद्ध में अवचेतन मन का मार्गदर्शन रहा है।
कल्पना शक्ति ;च्वूमत व िटपेनंसप्रंजपवदद्ध
चाहे बड़े-बड़े धार्मिक गं्रथ हों या कालजयी रचनाएं, ताजमहल हो या एफिल टावर या ब्रुकलिन ब्रिज या मोबाइल, कम्प्यूटर या हवाई जहाज या सेटेलाइट उपकरण यह सब सृजनात्मक विचारों तथा सृजन शक्ति के परिणाम हैं। आप भी अवचेतन मन की शक्ति का प्रयोग कर कुछ नया और मौलिक कार्य कर सकते हैं।
रडार/ट्रांसमीटर
ब्रह्माण्ड का इस संसार में सबसे बड़ा ट्रांसमीटर/रडार हमारा अवचेतन मन है जो कि रेडियो, टी. वी. वायरलेस, सैटेलाइट सिस्टम से ज्यादा बड़ा व व्यापक है। हमारा अवचेतन मन हमारे विचारों-इच्छाओं और कल्पनाओं को ब्रह्माण्ड के किसी भी कोने में भेज सकता है। इसी कारण टेलीपैथी ;विचारों का दूर संप्रेषणद्ध संभव है।
सम्मोहन विज्ञान
हिप्नोटिज्म या सम्मोहन विज्ञान पूरा अवचेतन मन का विज्ञान है। जिसमें चेतन मन को शांत कर अवेचतन मन को सुझाव दिए जाते हैं। इन सुझावों के द्वारा आपकी गलत आदतों, मान्यताओं व धारणाओं को बदला जा सकता है। डर को निकाला जा सकता है। शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक समस्याओं व बीमारियों को दूर किया जा सकता है। दरअसल अवचेतन मन के पास न तो बु(ि-विवेक होता है और न ही विरोध की क्षमता। उसे तो जो भी कल्पना शक्ति द्वारा जो भी विचार-सुझाव दिए जाते हैं। वह उन्हें सच मान लेता है तथा वैसा ही व्यवहार व वैसे ही परिवर्तन आपके अन्दर ले जाता है। सम्मोहन द्वारा बिना बेहोशी की दवा के आॅपरेशन के हिस्से तो जग जाहिर है।
पीएलआर ;च्ंेज सपमि त्महतंजपवदद्ध
सम्मोहन विधि से चेतन मन को पूरी तरह शांत करके अल्फा एवं थीटा स्थिति में ले जाकर, किसी को भी बचपन की यादों, पूर्व जन्म एवं भविष्य में आसानी से ले जा सकते हैं जहां वह पूर्व जन्म, बचपन या भविष्य की एक-एक घटना को चलचित्र/स्वप्न की भांति देख सकता है तथा वर्तमान में जो भी सुख-दुःख, अमीरी-गरीबी या मधुर या कुछ संबंधों को जी रहा है। उसका कारण पूर्व जन्म में देखकर अपने विचार-व्यवहार में परिवर्तन लाकर इस जन्म को सार्थक व सुखी बना सकता है।
सपनों का विज्ञान
सपने अंतर्पे्ररणा के द्वारा मार्गदर्शन देते हैं। सपनों का गूढ़ अर्थ होता है और इसमें कोई भविष्य का भ संदेश छिपा होता है। हमारे कई अनसुलझे सवालों का जवाब सपनों में मिल जाता है। कलाकार, लेखक, संगीतकार, वैज्ञानिक, आविष्कारकर्ता सपनों के माध्यम से मार्गदर्शन या अपने प्रश्नों के उत्तर पा लेते हैं।
कई सपने हमारे तनावों, चिंताओं, अतृप्त इच्छाओं, वासनाओं आदि के प्रतिबिंब होते हैं। जिनकी गहरी छाप हमारे मन पर पड़ी रहती है। इसी प्रकार जिन शक्तियों या इष्टदेव पर हम श्रृ(ा रखते हैं। वह दिव्य आत्माएं या हमारे पुरखे हमें सपनों के माध्यम से सचेत करते हैं या हमारा मार्गदर्शन करते हैं। ध्यान रखें-पेट की खराबी की वजह, तामसिक, राजसिक भोजन, वर्तमान चिंता-तनाव या घटनाएं व स्थिति आदि की वजह से 90 प्रतिशत गरीबी व भय के सपने आते हैं जो बेकार होते हैं। सकारात्मक चिंतन मनन सकारात्मक सपने व नकारात्मक चिंतन मनन नकारात्मक सपने लाता है। सपने अवचेतन मन की परछाई/प्रतिबिम्ब हैं।
मन की विशेषताएं

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

हमारा मन तो एक ही है लेकिन इसके दो स्पष्ट और विशिष्ट कार्यकारी भाग हैं। इन दोनों के अपने विशिष्ट गुण और शक्तियां है। मन के इन दोनों कार्यों मंे अन्तर समझने के लिए इसे कई नामों से पुकारा जाता है। लेकिन मैंने इस पुस्तक में चेतन मन और अवचेतन मन शब्द का प्रयोग किया है। मन के अलग-अलग नाम इस प्रकार हैं।
चेतन मन;ब्वदबपवने डपदकद्ध अवचेतन मन;ैनइ ब्वदबपवने डपदकद्ध
वस्तुनिष्ठ ;व्इरमबजपअमद्ध मन व्यक्तिनिष्ठ ;ैनइरमबजपअमद्ध मन
जाग्रत मन अर्ध जाग्रत मन/सुषुप्त मन
सतही मन गहरा मन
स्वेच्छिक मन;टवसनदजंतलद्ध अनेच्छिक मन;प्दअवसनदजंतलद्ध
दायां मस्तिष्क वायां मस्तिष्क

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