वाहन सरेंडर के कई घंटे बाद लूट की सूचना से मचा हड़कंप, एजेंसी बोली – CCTV और वीडियो में दर्ज है पूरा घटनाक्रम
खैर रोड स्थित फाइनेंस एजेंसी को लूट बताकर वीडियो वायरल, एजेंसी ने बताया – यह केवल लोन सरेंडर का मामला

अलीगढ़ | 30 जुलाई 2026

खैर रोड स्थित खेरेश्वर चौराहे पर संचालित श्री श्याम एसोसिएट्स, जो Hero Fincorp की अधिकृत फाइनेंस कलेक्शन एवं लीगल वेंडर एजेंसी है, ने सोशल मीडिया पर वायरल किए गए वीडियो को भ्रामक बताते हुए अपना पक्ष सार्वजनिक किया है।
एजेंसी के अनुसार, दिनांक 30 जुलाई 2026 को सुबह लगभग 10:00 से 11:00 बजे के बीच वाहन संख्या UP 13 BY 5162 (लोन नंबर BULTWL00100009163160) के उधारकर्ता रामकिशन शर्मा स्वयं एजेंसी कार्यालय पहुंचे और अपनी इच्छा से वाहन सरेंडर किया। एजेंसी का दावा है कि इस दौरान बनाया गया वीडियो उपलब्ध है, जिसमें संबंधित व्यक्ति स्वयं यह कहते हुए दिखाई देता है कि “मैं अपनी गाड़ी जमा कर रहा हूँ।”

एजेंसी का कहना है कि वाहन सरेंडर की प्रक्रिया शांतिपूर्वक पूरी हो गई थी। इसके कई घंटे बाद, देर शाम कुछ लोग कार्यालय पहुंचे और कथित रूप से लूट जैसी बात कहकर हंगामा करने लगे। स्टाफ ने उन्हें बताया कि कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारी अगले दिन उपलब्ध होंगे और उसी समय बात की जा सकती है। इस बात से नाराज़ होकर साथ आए एक व्यक्ति ने स्थानीय पुलिस को सूचना दे दी।

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों की बात सुनी। एजेंसी के अनुसार, पुलिस को स्पष्ट किया गया कि यह किसी प्रकार की लूट या जबरन वाहन छीनने की घटना नहीं, बल्कि Hero Fincorp के लोन से संबंधित वाहन सरेंडर का मामला है। एजेंसी का यह भी कहना है कि संबंधित ग्राहक को फाइनेंस कंपनी द्वारा पूर्व में आवश्यक नोटिस भेजा जा चुका था तथा श्री श्याम एसोसिएट्स, Hero Fincorp की अधिकृत लीगल वेंडर एजेंसी के रूप में कार्य कर रही है।
एजेंसी ने आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद एक व्यक्ति, जिसने स्वयं को पत्रकार बताया, ने घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर इस प्रकार प्रसारित किया जिससे यह लूट का मामला प्रतीत हो। एजेंसी का कहना है कि इससे उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा, संचालक को मानसिक पीड़ा हुई तथा समाज में संस्था की छवि प्रभावित हुई।

एजेंसी के अनुसार, वाहन सरेंडर का वीडियो, कार्यालय में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्य पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हैं। आवश्यकता पड़ने पर इन्हें संबंधित जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है।